अदभुत गणतंत्र हमारा है

सागर जिसके चरण पखारे
गिरिराज हिमालय रखवाला है
कोसी गंडक सरयुग है न्यारी
गंगा यमुना की निर्मल धारा है
अनेकताओ में बहती एकता
अदभुत गणतंत्र हमारा है
केसरिया सर्वोच्च शिखर पर
मध्य में इसके तो उजियारा है
यह चक्र अशोक स्तंभ का देखो
तिरंगे के नीचे में हरियाला है
तीन रंग का ये अपना तिरंगा
ये हम सबको प्राणों से प्यारा है
वीर सपूतों की ये पावन धरती
शहीदों ने स्व लहू से संवारा है
जनता यहां करती है शासन
अकेले आजाद वो रखबारा है

आचार्य गोपाल जी
उर्फ
आजाद अकेला बरबीघा वाले
प्लस टू उच्च विद्यालय बरबीघा शेखपुरा बिहार

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This Post Has 3 Comments

  1. Kranti Kshetragya

    बहुत खूब

  2. मनीभाई नवरत्न

    भारतमाता की गुणगान करती हुई कविता

  3. राज

    सुंदर रचना

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