KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

अब्र के दोहे(abra ke dohe)

मस्ताया मधुमास है, गजब दिखाए रंग।
फागुन बरसे टूटकर, उठता प्रीत तरंग।।
लाया फूल पलाश का, मस्त मगन मधुमास।
सेमल-सेमल हो गया, फागुन अबके खास।।
काया नश्वर है यहाँ, मत भूलें यह बात।
कर्म अमर रहता सदा, भाव जगे दिन रात।।
सार्वजनिक जीवन सदा, भेद भाव से दूर।
जिनका भी ऐसा रहा, वो जननायक शूर।।
होली में इस बार हम, करें नया कुछ खास।
नर नारी दोनों सधे, पगे प्रेम उल्लास।।
होंली के हुड़दंग में, रखें सदा यह याद।
अक्षुण्ण नारी मान हो, सम्मानित सम्वाद।।
धूम मचाएँ झूम के, ऐसा खेलें फाग।
जीवन में खुशियाँ घुले, पगे प्रेम अनुराग।।
हर्षित अम्बर है यहाँ, भू पुलकित है आज।
सतरंगे अहसास से,, उड़ी हुई है लाज।।
जपें नाम प्रभु राम का, इसका अटल विधान।
तारक ईश्वर हैं यही, सद्गति के सन्धान।।
✒कलम से
राजेश पाण्डेय *अब्र*
    अम्बिकापुर