अभी बाकी है-मदन मोहन शर्मा ‘सजल'(Abhi baki hai)

अभी बाकी है-मदन मोहन शर्मा ‘सजल’

धीरे चल जिंदगी ज्वलंत सवालों के जवाब अभी बाकी है, 
जिसने भी तोड़े दिल ऐसे चेहरों से हिसाब अभी बाकी है,

अंधियारी गहन रातों में ही बेहिचक संजोए हसीन पल, 
पूनम की रात और चांद चांदनी का शबाब अभी बाकी है,

पीता रहा अश्कों के जाम सूनी अंखियों में यादें लेकर, 
अतृप्त होठों की बुझ जाए प्यास नेह की शराब अभी बाकी है,

प्यार के हिंडोले में सुध बुध खोया मन हिमगिरि सा बदन, 
दीदार कर लूं जी भर चेहरे से हटना नकाब अभी बाकी है,

इसके पहले गमों की आग में झुलसे जीवन सफर मौत तक का, 
‘सजल’ गुजरे हर लम्हा यादों में ऐसे ख्वाब अभी बाकी है।
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मदन मोहन शर्मा ‘सजल’
कोटा, (राजस्थान)

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