अमित की कुण्डलियाँ (Amit ki kundaliyan)

अमित की कुण्डलियाँ

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
*माता भव भयहारिणी, करिये हिय भयहीन।*
*जगजननी जगदंबिका, जीवन कृपा अधीन।*
*जीवन कृपा अधीन, मातु सुत तुम्हीं सम्हारो।*
*विनती बारंबार, व्यथा से हमें उबारो।*
*कहे ‘अमित’ कविराज, आप ही सुख-दुख दाता।*
*सुनिये करुण पुकार, आज ओ मेरी माता।*

*भव्य भवानी भाविनी, भवपाली हैं आप।*
*संकट विकट उबारिए, हरिए मन अभिताप।*
*हरिए मन अभिताप, अगोचर अज अविनाशी।*
*दें वैभव वरदान, सिद्धि दात्री अमृताशी।*
*कहे ‘अमित’ कविराज, जयति जय मातु शिवानी।*
*विनती बारंबार, भक्त की भव्य भवानी।*

*आदि अनंता मातु श्री, आप जगत आधार।*
*आदरणीया आदिता, मानें जग आभार।*
*मानें जग आभार, जीव की माँ आकारी।*
*मिले स्नेह आशीष, बनें हम सत आचारी।*
*कहे ‘अमित’ कविराज, शक्ति ही विश्व नियंता।*
*आदर सहित प्रणाम, हृदय से आदि अनंता।*
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

✍ *कन्हैया साहू ‘अमित’*✍
शिक्षक-भाटापारा छत्तीसगढ़

(Visited 2 times, 1 visits today)