अवतरण दिवस माँ गंगा का (avataran divas maa ganga ka)

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अवतरण दिवस माँ गंगा का 
दशमी  तिथि थी जेष्ठ मास 
इसके पावन तट पर मनुज ने 
किया  सभ्यता का  विकास l

पावन,निर्मल, अविरल है गंगा 
विशाल  जलधारा शीतल  जल 
हिमगिरि के शिखरों से निकली 
बहती नित कल-कल छल-छल l

शिव की पावन जटा से आई 
धरती को मिला श्रेष्ठ वरदान 
माता  सम है  पूज्य  ये  गंगा 
वेदों में इसकी महिमा महान l

सभ्यता सृजित हुई गंगा तट पर 
मानव जगत की है  पालनहार 
युगों  से  सबकी  प्यास बुझाती 
माता तुल्य देती समृद्धि  दुलार l

गंगा के पूजित कोमल जल में 
असीम पावनता का  है संचार 
स्नान करके सब पुण्य कमाते 
माता के तट पर आता संसार l

स्वार्थ में अंधा होकर मनुज ने 
मैला  कर माँ  को पाप  किया 
आपदा रूप में क्रोधित मैया ने 
पतित  हो  हमको  श्राप दिया l

प्रदूषित किया गंगा को हमने 
संकट  के हैं मंडराते  बादल 
कहीं रुख  मोड़ा  मानव ने 
गंदगी से किया मैला आँचल l

मोक्षदायिनी जीवनदायिनी माँ 
गंगा  का हम  सम्मान  करें 
स्वच्छ रखें सदा माँ का आँचल 
गंगा दशहरा पर ये आह्वान करें l

कुसुम लता पुन्डोरा 

नई दिल्ली

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