KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

आंखों से दूर हो दिल से दूर नहीं

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आंखों से दूर हो दिल से दूर नहीं

आंखों से दूर हो, दिल से दूर नहीं ।।
तुम बुला लो फिर ,हम हो जाएंगे हाजिर।।

मन तड़पता है तेरी यादों में,
होश मेरा जब खोता है।
चैन ढूंढता है यह किताबों में ,
सारा जग जब सोता है।
इसी आस पर बेचैनी मिटे,
तुम मशहूर हो मजबूर नहीं।

हमारा क्या है सनम?
हम हैं रमते राम ।
कट जाएंगे ऐसे ही
सब रंगीली शाम।।
पल पल हम मरते रहे  हैं,
दर्द जुदा  सहते रहे हैं।
और कहते रहे हैं तेरा होगा कसूर
पर जरूर नहीं।।

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