KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

आओं करें भारतीय नववर्ष का अभिनंदन(aao kare bhartiya navvarsh ka abhinandan)

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 आओं करें भारतीय नववर्ष का अभिनंदन
हवाएं महक रही है, कोयल चहक रही हैं।
लताएं झूम रही हैंं, बरखा बरस रही हैं।।
नव सूरज उग आया, नव हैं प्रभात।
चेहरों पर हंसी,उल्लास और खुशी ; नव हैं स्वागत।।
फूल धरती के चमन में खिल रहे।
आज दिल से दिल हर तरफ हैं मिल रहे।।
मंदाकिनि प्रेम की हर तरफ बह रही।
स्वर लहरियां कानों में जैसे कुछ कह रही।।
आई है चैत्र शुक्ल वर्ष प्रतिपदा,
आओं करें भारतीय नववर्ष का अभिनंदन।
नया जोश हैं, नया होश हैं, नई स्फूर्ति फैल रही।
खुशबू प्यार ही प्यार की, महक बनकर मन मोह रही।।
आंगन में बहार लौटी हैं , मिश्री मौसम में घुलती हैं।
ठंडी हवाएं परबतों , नदी नालों से जा मिलती हैं।।
अमराई में गाती कोकिल, हृदय में अमृत घुलता हैं।
भारतीय नववर्ष में आदर सत्कार संग चलता हैं।।
भ्रमरों की टोली फूलों की खुशबूं सूंघ रही।
जोश और जुनून कंगूरे जैसे कोई चूम रही।।
आई है चैत्र शुक्ल वर्ष प्रतिपदा,
आओं करें भारतीय नववर्ष का अभिनंदन।
बाहर देखों हल्की धूप फैली हैं।
धरती मां की चादर सुहानी, नहीं ये मैली हैं।।
मानव मन तरंगित, दिशाएं भी झूम रही।
भूल गये सब दुख दर्द, नहीं दिल में कोई हूम रही।।
ज्योति तरंग से मन हर्षित हैं।
भारत की धरती नव संवत्सर से आज गर्वित हैं।।
नववर्ष में नव हर्ष हैं , जीवन बना आज उत्कर्ष हैं।
नववर्ष में नव गीत हैं, नव प्रीत हैं, नव च़राग मेंं खिला हर्ष हैं।।
आई हैं चैत्र शुक्ल वर्ष प्रतिपदा,
आओं करें भारतीय नववर्ष का अभिनंदन।
जीत नवल हैं, सुकून भरा हैं आज माहौल।
हर तरफ रंग, हर तरफ चंग, बढ़ रहा आज मेलजोल।।
उजला उजला पहर हैं, मंजर खूब सुहाना।
नव गीत से, नव प्रीत से भारतीय नववर्ष हैं आज मनाना।।
न कोई शिकवा हैं, न ही कोई गिला हैं।
इंसान, इंसान से आज खुशी संग मिला है।।
उज्ज्वल उज्ज्वल प्रकाश हैं, पंछी कलरव गा रहे।
समन्दर,  पहाड़, नदियां, वनस्पतियां मस्ती में छा रहे।।
आई हैं चैत्र शुक्ल वर्ष प्रतिपदा,
आओं करें भारतीय नववर्ष का अभिनंदन।
सौर,चंद्र, नक्षत्र,सावन ,अधिमास का क्या खूब समावेश हैं।
ब्रह्मदेव ने की थी सृष्टि रचना, जग ने जानी महिमा, ये भारत देश हैं।।
मधु किरणें पूरब दिशा से आज बरस रही हैं।
सिंदूरी हैं भोर, फसलें खेतों में लहक रही हैं।।
चार दिशाओं ने घोला कुंकुम, वातावरण हसीन ।
सूरज  हैं सौगातें लाया,  किरणें हैं रंगीन।।
अवनी से अम्बर तक घुल गई मिठास।
चैत्र मास में होता भारतीय नववर्ष का अहसास।।
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