आज लेखनी ……रुकने मत दो..

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~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ*

*आज लेखनी ….*
. *….रुकने मत दो*
. ( लावणी छंद)
. 🤷🏻‍♀🤷🏻‍♀
एक हाथ में थाम लेखनी,
गीत स्वच्छ भारत लिखना
दूजे कर में झाड़ू लेकर,
घर आँगन तन सा रखना
स्वच्छ रहे तन मन सा आंगन,
घर परिवेश वतन अपना
शासन की मर्यादा मानें
सफल रहेगा हर सपना

अपनी श्वाँस थमें तो थम लें,
जगती जड़ जंगम रखना
जग कल्याणी आदर्शों में
तय है मृत्यु स्वाद चखना
आदर्शो की जले न होली
मेरी चिता जले तो जल
कलम बचेगी शब्द अमर कर,
स्वच्छ पीढ़ि सीखें अविरल

रुके नही श्वाँसों से पहले
मेरी कलम रहे चलती
जाने कितनी आस पिपासा
इन शब्दों को पढ़ पलती
स्वच्छ रखूँ साहित्य हिन्द का
विश्व देश अपना सारा
शहर गाँव परिवेश स्वच्छ लिख
चिर सपने सो चौबारा

आज लेखनी रुकने मत दो,
मन के भाव निकलने दो।
भाव गीत ऐसे रच डालो,
जन के भाव सुलगने दो।
जग जाए लहू उबाल सखे,
भारत जन गण मन कह दो।
आग लगादे जो संकट को,
वह अंगार उगलने दो।

सवा अरब सीनों की ताकत,
हर संकट पर भारी है।
ढाई अरब जब हाथ उठेंगे,
कर पूरी तैयारी है।
सुनकर सिंह नाद भारत का,
हिल जाएगी यह वसुधा।
काँप उठें नापाक वायरस,
रच दे कवि ऐसी समिधा।

कविजन ऐसे गीत रचो तुम,
मंथन हो मन आनव का,
सुनकर ही जग दहल उठे दिल,
संकटकारी दानव का।
जन मन में आक्रोश जगादो,
देश प्रेम की ज्वाला हो।
मानवता मन जाग उठे बस,
जग कल्याणी हाला हो।

आनव=मानवोचित
. 👀🦚👀
✍©
बाबू लाल शर्मा *विज्ञ*
बौहरा भवन
सिकदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
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