KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

आज लेखनी रुकने मत दो

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३०मात्रिक मुक्तक(१६,१४पर यति)
*आज लेखनी ….*
.     *….रुकने मत दो*
आज लेखनी रुकने मत दो,
मन के भाव निकलने दो।
भाव गीत ऐसे रच डालो,
जन जज्बात सुलगने दो।
आए जन खून उबाल सखे,
जन गण मन का भारत मे।
आग लगादे जो प्राणों में,
वह अंगार उगलने दो।
सवा अरब सीनों की ताकत,
पाक इरादों पर भारी।
ढाई अरब जब हाथ उठेंगे,
कर के पूरी तैयारी।
सुनकर सिंह नाद भारत का,
हिल जाएगी यह वसुधा।
काँप उठेंगे नापाकी ये,
आतंकी ताकत सारी।
कविजन ऐसे गीत रचो तुम,
मंथन हो मन आनव का,
सुनकर ही वे दहल उठे दिल,
आतंकी जन दानव का।
जन मन में आक्रोश जगादो,
देश प्रेम की ज्वाला हो।
रीत शहीदी जाग उठे बस,
धर्म निभे हर मानव का।
आनव=मानवोचित
✍©
बाबू लाल शर्मा “बौहरा”
सिकदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
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