KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

आरजू

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? *आरजू* ?

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प्रियतम कितने प्यारे हो,मेरी आँखों से पूछो।
पढ़ लो इन अँखियों में बस एक नजर देखो।
बसे हो श्वांस श्वांस में न बिछुडे जन्मसात में,
आरजू है मेरी ,रखें निज हाथ,हाथ में।
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है नेह तुमसे कितना , कैसे तुम्हें बताऊँ ।
धड़कन में तुम बसे, दिल चीर कर दिखाऊँ।
मेंहदी से रचो हाथ मे,बिंदी से सजो माथ में।
बसे हो श्वांस श्वांस में,न बिछुडे जन्मसात में,
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मांगा जो मैंने विधि से,वैसा सजना है पाया।
मेरे प्राण मेरे साथी,बस मेरे मन है भाया।
जियेंगे साथ साथ में,लेकर हाथ हाथ में।
बसे हो श्वांस श्वांस में न बिछुडे जन्मसात में
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तुम्ही मेरी खुशियाँ हो,तुम्ही मेरी बन्दगी हो।
पलकों में छुपाया है,तुम्ही मेरी जिन्दगी हो।
रहना नैनों के पास में,मिले हो सौगात में ।
बसे हो श्वांस श्वांस में न बिछुडे जन्मसात में
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आरजू है दिल की, जब जब जनम मिले ।
मेरे मीत संग मुझको सौ सौ जनम मिले।
रहें खुश साथ साथ में,हँसे मेरी बात बात में।
बसे हो श्वांस श्वांस में न बिछुडे जन्मसात में
बसे हो — – – –
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सादर©

केवरा यदु “मीरा “
राजिम (छ0ग)??