उत्सव

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उत्सव
जिंदगी चार दिन की  चलो गीत गालें ।
हँस लें हम खुद औरों  को भी हँसालें ।
चाहें तो जिन्दगी को हम इस तरह सजालें ।
हर दिन दिवाली होली उत्सव मनालें ।
न बेरंग जीवन  हो संग मिलकर संवारें ।
रहें हरपल मगन छूटे हँसी के फव्वारें।
न हो भूखा पड़ोसी चलो मिल बाँट खालें।
जिंदगी का हर पल उत्सव सा मनालें ।
बेंटियों को रावण से  चल कर बचालें ।
सिसकती हुई बेटियों को हम हँसालें ।
रंगों की होली  से तन मन  रँगालें ।
दुश्मन रहे न कोई  मीत सबको बनालें ।
जिंदगी है उत्सव  नहीं उदासी हम पालें
चलो आज  सबको गले से लगालें।
केवरा यदु “मीरा “
राजिम

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