KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

उसकी होंठ होठों में लाली

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उसकी होंठ होठों में लाली

उसकी होंठ, होठों में लाली ।
उसकी आंखें, आंखों में काली ।
उसकी कान, कानों में बाली ।।
उसकी चाल, चाल मतवाली ।।
रात दिन तड़पा हूं मैं
करता रहा उसको फरियाद ।
अब ना पीर सहा जाए
करके उसका याद ।।

ढूंढा करता हूं मैं उसे
हर चौराहे हर गली।

तारीफें करें क्या उनकी
वो तो थी कुछ नई।
देख होश उड़ा करते थे
दिल दे बैठे कई।
शायद इसलिए लिए तू न मिली
सचमुच तू थी फुलझड़ी ।

गुम हो गई तुम हमसे
जिस रात को थी दीवाली।
वो चली गई दूर हमसे
फिर भी दिल में यादें हैं ।
शौक ए दिल में सनम
गूंजती तेरी हर बातें हैं ।
सचमुच यह जिंदगी है
एक अजीब सी पहेली।।

मनीभाई नवरत्न