KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

एक चांद, मेरे चांद से , आज क्यों नाराज है(manibhai navratna)

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एक चांद, मेरे चांद से , आज क्यों नाराज है ?
जरूर आज उसका, मेरे चांद से कम साज है।
शरमा के छुपा वो काला बादल का दुपट्टा ले,
उसे मेरे चांद के आगे आने में हो रहा लाज है।

ए चांद !तू फलक पर आ, आकर भले छुप जा ।
मेरे चांद को तड़पाकर ,  छुप छुप कर  ना जा।
उसका करवा  व्रत संकल्प पूरा होने दे तो  जरा
फिर लूंगा तेरी खबर,  तड़पा रहा जो आज है ।
एक चांद, मेरे चांद से……

( मनीभाई “नवरत्न”)
करवा चौथ व्रत विशेष रचना