KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

ओ मेरे दिल के हूजूर( o mere dil ke hujur)

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हां मैं  हूँ ,तुमसे दूर
पर मैं हूँ, बेकसूर ।
मुझे परवाह है तुम सबकी
इसीलिए मैंने ये कदम ली
मुझे दगाबाज ना समझना
मैं हालात से हूँ मजबूर ।
ओ मेरे दिल के हूजूर……..
वादा किया था जो तुमसे
चांद तारे तोड़ लाऊंगा ।
दुनिया भर की खुशी को
तेरे कदमों में बिछाऊंगा ।
तू भूल गई है शायद सब
पर मैं ना अब तक भूला हूं ….
मुझे दगाबाज ना समझना
मैं हालात से हूँ मजबूर ।
ओ मेरे दिल के हूजूर……..
है तू घर की आबरू,
मेरे हृदय की रानी है ।
तेरे सपने हैं अधूरे से ,
कुछ चाहत भी पुरानी है ।
छोड़ो आया हूं मैं ,
कलेजे के टुकड़ों को ।
मेरे हिस्से के भी प्यार दे देना तू
मुझे दगाबाज ना समझना
मैं हालात से हूँ मजबूर ।
ओ मेरे दिल के हूजूर……..
जानूं मेरे बिन तुझे तकलीफ होती है ।
पर सबकी नसीब कहां एक सी होती है ?
मैं मेरी जिंदगी छोड़ आया तेरे पास
जल्दी से आऊंगा, कर ले विश्वास ।
आस जगाए रखना दिल में ,
नैन बिछाए रखना है मेरी ये आरजू…..
मुझे दगाबाज ना समझना
मैं हालात से हूँ मजबूर ।
ओ मेरे दिल के हूजूर……..

 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़