ओ मेरे दिल के हूजूर( o mere dil ke hujur)

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हां मैं  हूँ ,तुमसे दूर
पर मैं हूँ, बेकसूर ।
मुझे परवाह है तुम सबकी
इसीलिए मैंने ये कदम ली
मुझे दगाबाज ना समझना
मैं हालात से हूँ मजबूर ।
ओ मेरे दिल के हूजूर……..
वादा किया था जो तुमसे
चांद तारे तोड़ लाऊंगा ।
दुनिया भर की खुशी को
तेरे कदमों में बिछाऊंगा ।
तू भूल गई है शायद सब
पर मैं ना अब तक भूला हूं ….
मुझे दगाबाज ना समझना
मैं हालात से हूँ मजबूर ।
ओ मेरे दिल के हूजूर……..
है तू घर की आबरू,
मेरे हृदय की रानी है ।
तेरे सपने हैं अधूरे से ,
कुछ चाहत भी पुरानी है ।
छोड़ो आया हूं मैं ,
कलेजे के टुकड़ों को ।
मेरे हिस्से के भी प्यार दे देना तू
मुझे दगाबाज ना समझना
मैं हालात से हूँ मजबूर ।
ओ मेरे दिल के हूजूर……..
जानूं मेरे बिन तुझे तकलीफ होती है ।
पर सबकी नसीब कहां एक सी होती है ?
मैं मेरी जिंदगी छोड़ आया तेरे पास
जल्दी से आऊंगा, कर ले विश्वास ।
आस जगाए रखना दिल में ,
नैन बिछाए रखना है मेरी ये आरजू…..
मुझे दगाबाज ना समझना
मैं हालात से हूँ मजबूर ।
ओ मेरे दिल के हूजूर……..

 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़