कतार(kataar)

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आज शहर से होते हुए,
गुजर रहा था मैं ।
कि सहसा देखा एक कतार ।
भारत में ऐसी पहली बार ,
बड़ी अनुशासन से ,
बिना शोर किये,
एक दूजे को इज्जत देते हुये।
मैंने संतोष लिये मन में ,
देखना चाहा उनकी मंजिल।
जहाँ पर लगा था सबका दिल ।
पहले तो सोचा,
बैंक की कतार होगी ।
मगर नोटबंधी का असर
हो चली है बेअसर।
सोचा होगा कोई
नये बाबा का प्रवचन।
पर यहाँ सुनाई नहीं देती
कोई वादन या भजन।
फिर खयाल आया
बाहुबली-दो का रिलीज ,
पर यहाँ तो ना कोई बैनर
ना कोई लाउडस्पीकर ।
कुछ दूर आगे बढ़ा
और पाया अनोखा नजारा
देशी दुकान में शराब की धारा ।
ताज्जुब हुआ कि
अब भीड़ में कोई होश नहीं गंवाता है ।
कतार में रहकर भी कोई
ना चिखता है,चिल्लाता है।
आज अगर इस पर लिखूं
कुछ विरोध के स्वर
तो है मुझे डर।
कि कहीं लोग मुझे
कह ना दें होके मुखर ।
“तेरे कमाई का भला कौन खाता है?
चल हट !तेरे बाप का क्या जाता है?”

(रचनाकार :-मनी भाई भौंरादादर बसना ) 

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़