कनहू नी समझे किसान के दरद ला(kanhu ni samajhe kisan ke darad la)

*किसान के दरद*
(छत्तीसगढ़ी रचना)

कनहू नी समझे
किसान के दरद ला
पहिली के पहिली बूता
हर बाचेच हे।
समे नइये  गंवई घूमे के ,
लोकजन ला भूला गयहे
रबी फसल के चक्कर म ।
एसो लागा ल भी
अड़बड़ छुट करिस शासन ह।
तहुंच ले नई चुकता होईस
सेठ के तीन परसेंटी बियाज।
जोशेजोश म बोर ल खदवाईस हे।
जम्मो डोली टिकरा ल उपजाईस हे।
बिजली आफिस के
कोरी चक्कर लगाईस हे।
टेंशन म सबो चुंदी झर्राईस हे।
कनहू काल म
“लईन गोल” हो जाथे।
गेरी के मछरी बरोबर
हो जाथे किसान।
न खेत-खार पोसै सकय न छाड़त।
हदरके हटर-हटर
काटत राथे मंझनिया
रुक तरी म।
लेकम
कनहू नी समझे किसान के दरद ला
किसनहा मन ही जानही……
✒️मनीभाई ‘नवरत्न’ भौंरादादर,बसना, छत्तीसगढ़।
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़