KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता की परिभाषा बताती यह कुण्डलियाँ, जो अनुप्रास अलंकार का नायाब उदाहरण प्रस्तुत करती बाबूलाल शर्मा बौहरा जी का अकल्पनीय रचना

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कुण्डलियाँ

विषय- कविता
कविता काव्य कवित्त के, करते कर्म कठोर।
कविजन केका कोकिला,कलित कलम की कोर।
कलित कलम की कोर, करे कंटकपथ कोमल।
कर्म करे कल्याण, कंठिनी काली कोयल।
कहता कवि करजोड़, करूँ कविताई कमिता।
काँपे काल कराल, कहो कम कैसे कविता।

कमिता ~कामना

…… बाबू लाल शर्मा,बौहरा

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2 Comments
  1. अनाम says

    बहुत खूब कहा

  2. अनाम says

    शानदार