कविता मेरी ऐसी हो(kavita meri aisi ho)

कविता मेरी  ऐसी हो
जिसमें हो कोई संदेश ।
संतों की वाणी हो जिसमें
गीता का उपदेश ।
गौतम हो गुरू नानक हो
हो उनकी गुरु वाणी
गंगा जल की पवित्रता हो
महानदी का पानी ।
गंगा से सिंचित कविता को
मिले नया  परिवेश ।
संतों की वाणी हो जिसमें
गीता का उपदेश ।
लक्ष्मी बाई हो कविता में
भगत सिंग  बलिदानी ।
विस्मिल और सुभाष भी हो
इतिहास की अमर कहानी
मेरी कविता में  छुपा हो
गाँधी जी का वेश ।
संतों की वाणी हो जिसमें
गीता का उपदेश ।
मेहनत हो जिसमें कृषकों की
खेतों की हरियाली ।
धान का कटोरा  हो
होली और दिवाली ।
रंग गुलाल सने कविता को
चकित हो दुनिया देख ।
संतों की वाणी हो जिसमें
गीता का उपदेश ।
सिया राम हो भाई भरत हो
और हो अवध नगरिया ।
भातृ प्रेम से भरा हुआ हो
और कौशल्या मैंया ।
कल बहती सरयू हो
जिससे मिल जाये वेग ।
संतों की वाणी हो जिसमें
गीता का हो संदेश ।
राधा कृष्ण का अमर प्रीत हो
ग्वालों का अपना पन ।
“मीरा ” हो गिरधर दिवानी
कान्हा का बृन्दाबन ।
विरहन गोपियों को मिले
उधो का संदेश ।
संतों की वाणी हो जिसमें
गीता का उपदेश ।।
हो चाहे वह हिन्दू मुस्लिम
हो वह सिख ईसाई ।
राम रहीम  अल्लाह एक है
हम सब भाई भाई ।
गीता बाईबल संग संग गूँजे
न हो मन में कोई द्वेष ।
संतों की वाणी हो जिसमें
गीता का उपदेश
कविता मेरी ऐसी हो जिसमें
हो कोई संदेश ।
संतों की—
केवरा यदु “मीरा “
राजिम
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