KAVITA BAHAR
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बिजली

बिजली

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बिजली सबको प्यारी लगती,
घर-घर उजियारा फैलाती है ।

दूर देश से यह आती,
पल भर में पहुँच जाती है ।।

पल भर भी ना रहे बिजली तो,
तर-तर पसीना निकल जाता है ।

सभी मशीनें इसी पर टिकी हुई,
ना रहे तो बंद पड़ जाती है ।।

घर की गृहणियां इसे देखती,
मशीन से चटनी पीस जाती हैं ।

किसान काका इसी पर निर्भर,
फावड़ा-औजार चल जाती है ।।

देश-दुनिया की तरक्की में,
हमेशा साथ निभाती है।

बिजली सबको प्यारी लगती,
घर-घर उजियारा फैलाती है ।।

✍️ लोकेश कुमार भोई
शिक्षक
बसना, जिला-महासमुन्द (छ. ग.)

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