कवि जो ऐसे होते हैं(kavi jo aise hote hai)

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कवि के हाथ मे है बाँसुरी
जो मधुर स्वर प्रवाहित करता है ,
आवश्यकता होने पर कवि
युद्ध का शंखनाद वह भरता है !
कवि साहित्य में अपनी कलम से
समाज मे अमूलचूल परिवर्तन लाता है,
धर्म,नीति,राजनीति,तथा उपदेश
ये जो पास ठहर नही  पाता है !
कवि जो होता बिलकुल मनमौजी
जिस पर बाह्य नियत्रंण न होता है,
फिर भी मर्यादाओं में बंध कर वो
श्रेष्ठ मानव,प्रबुद्ध विचारक होता है !
नैतिक,मौलिक,दार्शनिक मूल्यों का
लेखन में बखूबी सामंजस्य पिरोता है,
केवल मनोरंजन वह रचता नही
उचित उपदेश का मर्म संजोता है !
      — *राजकुमार मसखरे*
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