कहें सच अभी वो जमाना नहीं है(kahe sach abhi wo zamana nahi hai)

कहें सच अभी वो जमाना नहीं है।
यहाँ सच किसी को पचाना नहीं है॥
मिले जो अगर यूँ किसी को अँगाकर। 
खिला दो उसे तो पकाना नहीं है॥
लगे लूटने सब निठल्ले यहाँ पर।
उन्हें तो कमाना धमाना नहीं है॥
मुसीबत अगर आ गई तो फँसोगे। 
यहाँ बच सको वो बहाना नहीं है॥
पसीना बहाया यहाँ पर कमाने। 
मिले मुफ्त में वो खजाना नहीं है॥
समझना अगर है तभी तो बताओ।
अकारण मुझे सर खपाना नहीं है॥
रहूँ सिर्फ बालक अगर हो सके तो।
बड़ा नाम कोई कमाना नहीं है॥
*बालक “निर्मोही”*✍
      बिलासपुर
  26/05/2019
        23:30
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Balak Nirmohi

बालक दास गर्ग' निर्मोही जी का जन्म 01 जुलाई सन 1971 को ग्राम अकलतरा तहसील भाटापारा जिला बलौदाबाजार (तत्कालीन जिला रायपुर) छत्तीसगढ़ राज्य में एक साधारण परिवार में हुआ था। इनके पिता जी का नाम स्व. श्री सुकूल गर्ग एवं माता जी का नाम श्रीमती राम बाई है। ये पाँच भाइयों एवं दो बहनों में सबसे छोटा और लाड़ला हैं। शैक्षणिक योग्यता के क्षेत्र में विज्ञान संकाय में बारहवीं उत्तीर्ण ही कर पाये क्योंकि बी. एस. सी. प्रथम वर्ष में प्रदेश लेने के बाद किसी विशेष प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इनको बीच में कॉलेज छोड़ना पड़ा। आज ये वर्तमान में रेलवे के विद्युत कर्षण वितरण विभाग में तकनीशियन वर्ग-I के पद पर देश सेवा में कार्यरत हैं। बचपन से ही इन्हें साहित्य एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में गहरी रूचि रही है। इसके अलावा जन सेवा करना भी इन्हें अत्यधिक पसंद है। साहित्य सेवा के क्षेत्र में इनकी उपलब्धि सराहनीय रही है। अब तक आपको, साहित्य गौरव,साहित्य श्री, नयी पीढ़ी की आवाज आदि सम्मान मिल चुके हैं।