KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

काली कोयल

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काली कोयल

कोयल सुन्दर काली -काली,
हरियाले बागों की मतवाली।
कुहू-कूहू करती डाली-डाली,
आमों के बागों मिसरी घोली।


‘चिड़ियों की रानी’ कहलाती,
पंचमसुर में तुम राग सुनाती।
हर मानव के कानों को भाती,
मीठी बोली से मिठास भरती।

मौसम बसंत बहुत सुहाना,
काली कोयल गाती तराना।
रूप तुम्हारा प्यारा सयाना,
जंगलवासी का मन हरना।


कोकिला, कोयल, वनप्रिया,
बसंतदूत,सारिका नाम पाया।
पेड़ों के पत्तों में छिप जाया,
मीठी बोली तुमने गाना गाया।


ईश्वर ने दिया उपहार स्वरदान,
मीठी वाणी से करती सम्मान।
‘रिखब’ करता विनती भगवान,
मुझको मीठा स्वर दो वरदान।


@रिखब चन्द राँका ‘कल्पेश’जयपुर

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