KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

किश्त में

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किश्त में

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नहीं है कोई चिंता की बात,
जनाब हम हैं,आपके साथ।
आज खाली है आपके हाथ!
भाई! कल दे देना किश्त में।
क्या सुख सुविधा है पाना?
किस में दिल का ठिकाना ?
ले जाओ ना आप मनमाना,
बांध करके जरा किश्त में ।
क्यों रखते हो जी हिसाब?
हमसे कर लो ना पुछताछ ।
क्या स्कीम नहीं लाजवाब?
थोड़ा थोड़ा कर किश्त में।
लगा ना प्रस्ताव में लाभ।
संग उपहार भी नायाब।
मनमोहक सारे असबाब।
ख्वाब पूरे करो किश्त में।
फाइनेंसर की सुनकर दलील।
बेकाबू होने लगा अपना दिल।
रिकार्ड तोड़ ,बड़ा लिए बिल।
कर लिये पूरे शौक किश्त में।
अब चेहरा क्यों है उदास ?
चीजें आलीशान है पास ।
क्या करूं एसी की ठंड में
अब नींद आए किश्त में।।
हमने शीघ्रता की चाह में
भटकते जीवन की राह में
आय से ज्यादा व्यय हुआ
अब नहीं चाहिए किश्त में।।
✒️ मनीभाई’नवरत्न’,छत्तीसगढ़