KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कीर्ति जायसवाल

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सरकार से बात मनवाने
लाठी से बस तोड़ दिया;
पुलिस ने लाठी चार्ज किया
और जनता का सिर फोड़ दिया।
इधर भी लाठी बरस रही है;
उधर भी लाठी बरस रही है।
दो पक्षों के बीच में हर पल
कितनी चूड़ियाँ टूटी हैं!
किसी की चूड़ी टूट गई ज्यों
कुछ दुकाने फूट पड़ी त्यों;
किसी का सपना टूट कर बैठा;
कोई हर पल फूट रहा।
गली – गली जो दूध बेचता
दूध सड़क उड़ेल दिया;
फूंक दिया सरकार का पुतला
वादा जो न पूर्ण किया।
इधर टमाटर बरस रहा है;
उधर वो जनता गटक रहा है।
तोड़ – फोड़, ईमान छोड़
तू खुद को ही तो छल रहा है।
– कीर्ति जायसवाल
प्रयागराज