KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कुंडलियाँ

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कुण्डलियाँ

शंका मन में मत रखो ,शुद्ध रखो आहार ।
हाथों को रख स्वच्छ नित, होंगे क्यों बीमार ।
होंगे क्यों बीमार ,नही बन आमिष भोगी ।
स्वस्थ निरोगी देह, रखो मत काया रोगी
सदा योग से नेह, बजे कसरत का डंका
करो सभी से स्नेह, तजो निज मन से शंका।

अरुणा डोगरा शर्मा,
मोहाली।