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केवरा यदु “मीरा “द्वारा रचित सुन मैंया मोरी राधा से ब्याह करादे (sun maiya mori moru radha se byah kara de)

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सुन मैंया मोरी राधा से ब्याह करादे ।
राधा मेरो मन को भावे माता मोहि दिलादे ।
सुन मैंया मोरी राधा से ब्याह करादे ।
मैंया –  ना ना लाला तू अभी है छोटा ।
अकल का भी तू है   मोटा ।
इस बात को दिल से भुलादे
रे कान्हा अभी ब्याह की बात भुलादे।।
कान्हा –गैया चराने मैंया मैं न जाऊँ ।
माखन मिसरी  माँ  मैं  न खाऊँ ।
बस राधा ही मोहि दिलादे ।
सुन मैंया मोरी राधा से ब्याह करादे।।
मैंया–तू जाता गइयन के पीछे ।
राधा जायेगी तेरे पीछे पीछे ।
लाला बात  तू दिल से भुलादे ।
रे कान्हा अभी ब्याह की बात भुलादे ।।
कान्हा-आयेगी राधा मैंया सेवा करेगी ।
दूध दही  मटकी  से भरेगी ।
मैंया चाहे तो तू पाँव दबवाले ।
सुन मैंया मोरी राधा से ब्याह करादे।।
केवरा यदु “मीरा “
राजिम