कैसे लुटा दें कशमीर क्यारी

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.         *इन्द्रवज्रा छन्द*
विधान-प्रति चरण ११ वर्ण
२तगण(२२१)+१जगण(१२१)+२गुरु
दो-दो चरण समतुकान्त
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*कैसे लुटा दें कशमीर क्यारी*
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आओ सभी भारत के निवासी।
चालें चली है अब जो सियासी।
पाकी  पड़ोसी  करता जिहादी।
आतंक  भारी  ज्वर है मियादी।
.       सीमा  सुरक्षा  अपनी करेंगे।
.       आतंक  कारी  हमसे  डरेंगे।
.       माँ भारती है हमसे सुभागी।
.       होने न देंगे  उसको अभागी।
सींची  लहू  से धरती हमारी।
कैसे लुटा दें कशमीर क्यारी।
देंगे शहीदी  हम तो  जवानी।
सीमा  निहारे  करलें  रवानी।
.       जीते   जियेंगे   वरना   मरेंगे।
.       आवाम  मेरे  हित  ही  करेंगे।
.       माँ भारती का सपना सजा दें।
.       आतंक सारा जड़ से मिटा दें। 
राधे  मुरारी  धरती   तुम्हारी।
देखो कराहे  दुखिया बिचारी।
पाकी पिशाची करते जिहादी।
सोचे न  पापी  मनुता गँवादी। 
.       माने  मनादे   समझे  बतादे।
.       गीता हमे तू फिर से सुना दे।
.       हे सारथी आज पुरा कहानी।
.       माँ भारती के हित दोहरानी।

सेना  हमारी  तव अारती के।
हो सारथी तू अब भारती के।
आओ कन्हैया  रथ में हमारे।
साथी भरोसे  हम  है तिहारे।

.       मेटे धरा से फिर  पाप सारे।
.       किस्से  बनेंगे अपने तुम्हारे।
.       पापी मरेंगे सत  ही बचेगा।
.       ईमान धर्मी  रखना  पड़ेगा।
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✍©
बाबू लाल शर्मा “बौहरा”
सिकंदरा, 303326
दौसा,राजस्थान 9782924479
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