KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कोई जीता कोई हारा(koi jita koi hara)

हार जीत का वोट युद्ध था,
कोई जीता कोई हारा।
दल दलदल को भूल सखे अब,
अपना लो भाई चारा।
जीत किसी की नहीं चुनावी,
यह तो जनमत जीता है।
राष्ट्रप्रेम का भाव जगा है।
भूल समय जो बीता है।
हार नहीं है यह विपक्ष की,
यह तो बस गठबंधन हारा।
जाति धर्म अरु क्षेत्रवाद से,
करते लगते लोग किनारा।
जोड़ तोड़ का युग हारा है,
वंशवाद की जड़े हिली।
चाहत भारत माँ के आँचल,
एक रहे भारत सारा।
कदम बढ़ा सोपान चढ़ो अब,
नव भारत निर्माण करें।
सबके दिल में भारत हो बस,
भारत हित निर्वाण करें।
भारत के हित जीना मरना,
देश प्राण से प्यारा हो।
शान तिरंगे भारत माँ हित,
भाई चारा प्राण भरें।
.    ….…
✍©
बाबू लाल शर्मा, बौहरा
सिकंदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479

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