KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कोई तो है

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कोई तो है

बीज से पौधा फिर बीज
क्रम है निरन्तर
नियंता भी है
सुनो कोई तो है।

सुख और दुख अंतर्निहित
मन के भाव द्वन्दित
इन्हें सुलझाता है कौन
सुनो कोई तो है

नदिया से गागर गागर में सागर
बूंदों का बनना
फिर नीचे गिरना
क्रम अनवरत
कोई तो है

जीवन और मृत्यु
चिर निरन्तर अनुक्रम
पाप और मोक्ष
कर्मो का निर्वहन
संतृप्त की खोज
आत्म अन्वेषण
सुनो कोई तो है

आत्मा परमात्मा
परम् सुख जीवात्मा
मोह का बन्धन
प्रेम अनुबन्धन
बंधे है सब नियति की डोर
कोई तो है
तो क्यो नकारते
तुम अदृश्य सत्ता
क्यों झुठलाते
निर्विकार रूप
सत्य असत्य की कसौटी
परमेश्वर का सत
हां यही है यही है
अनादि अनीश्वर का रूप
हां कोई तो है
कोई तो है।

@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा जांजगीर चाम्पा