कोठी तो बढ़हर के छलकत ले भरगे (kothi to badhar ke chhalakat le bharage)

कोठी तो बढ़हर के* छलकत ले भरगे।
बइमानी के पेंड़ धरे पुरखा हा तरगे॥
अंतस हा रोथे संशो मा रात दिन।
गरीब के आँसू हा टप-टप ले* ढरगे॥
सुख के सपुना अउ आस ओखर मन के।
बिपत के आगी मा सब्बो* हा  जरगे॥
सुरता के रुखवा हा चढ़े अगास मा।
वाह रे वा किस्मत! पाना अस झरगे*
माछी नहीं गुड़ बिना हवे उही हाल।
देख के गरीबी ला मया मन टरगे॥
जिनगी अउ मन मा हे कुल्लुप अँधियार।
रग-बग अंजोर भले बाहिर बगरगे॥
वाह रे विकास सलाम हावय तोला।
धान, कोदो, तिवरा, मण्डी मा सरगे॥
नाली मा काबर भोजन फेंकाथे।
गरीबी मा कतको, लाँघन तो  मरगे॥ 
लोगन के कथनी अउ करनी ला देख।
*”निर्मोही”* बिचारा, अचरज मा परगे॥
     *बालक “निर्मोही”*✍
           बिलासपुर
        30/05/2019
             20:02
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Balak Nirmohi

बालक दास गर्ग' निर्मोही जी का जन्म 01 जुलाई सन 1971 को ग्राम अकलतरा तहसील भाटापारा जिला बलौदाबाजार (तत्कालीन जिला रायपुर) छत्तीसगढ़ राज्य में एक साधारण परिवार में हुआ था। इनके पिता जी का नाम स्व. श्री सुकूल गर्ग एवं माता जी का नाम श्रीमती राम बाई है। ये पाँच भाइयों एवं दो बहनों में सबसे छोटा और लाड़ला हैं। शैक्षणिक योग्यता के क्षेत्र में विज्ञान संकाय में बारहवीं उत्तीर्ण ही कर पाये क्योंकि बी. एस. सी. प्रथम वर्ष में प्रदेश लेने के बाद किसी विशेष प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इनको बीच में कॉलेज छोड़ना पड़ा। आज ये वर्तमान में रेलवे के विद्युत कर्षण वितरण विभाग में तकनीशियन वर्ग-I के पद पर देश सेवा में कार्यरत हैं। बचपन से ही इन्हें साहित्य एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में गहरी रूचि रही है। इसके अलावा जन सेवा करना भी इन्हें अत्यधिक पसंद है। साहित्य सेवा के क्षेत्र में इनकी उपलब्धि सराहनीय रही है। अब तक आपको, साहित्य गौरव,साहित्य श्री, नयी पीढ़ी की आवाज आदि सम्मान मिल चुके हैं।