क्रांति जी के हाइकु

क्रांति जी के हाइकु
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हाइकु

01)
रात गुजरी
नववर्ष आते ही
महका फूल ।

02)
महक उठी
फूलों की फुलवारी
झूमते भौंरे।।

03)
नया तराना
आया है नया साल
झूमे जमाना ।

04)
नदी किनारे
उमड़ती लहरें
मुझे पुकारे ।

05)
रखो उम्मीद
ईश की कृपा से ही
खुले नसीब ।

06)
नया सबेरा
नूतन वर्ष आते
छंटे अंधेरा ।

07)
सुलगे तन
पिया मिलन को
तरसे मन।।

08)
उषा किरण
संग अपने लाया
वर्ष नूतन।

09)
पुराने ख्याल
नव वर्ष के जैसे
बदल डाल ।

10)
मिलते नहीं
नदियों के किनारे
अटल सत्य।।

11)
बहती नदी
चट्टानों को चीरती
पानी की धार ।

⚜क्रान्ति, सीतापुर सरगुजा छग

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