KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

खुशियों का त्योहार है

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धूल उड़ रहे आसमान में
उड़ रहा अबीर गुलाल है
भेदभाव कटुता को मिटाकर
फैलाता चहुँओर प्यार है
ऐसा पावन पर्व है होली
खुशियों का त्योहार है
ऐसा पावन पर्व हमारा
रंगो का त्योहार है ।।
     धुरखेल हो गया सुबह में देखो
     शाम को उड़ेगे रंग
     सज- धज कर निकलेगी सजनीया
     डालेंगी पिया पे रंग
     पिचकारी में रंग भरे हैं
     और रंगो का फूहार है
     ऐसा पावन पर्व है होली
     खुशियों का त्योहार है ।।
क्या बच्चे क्या बूढ़े को भी देखो
मचा रहे हुड़दंग
उम्र की सीमा तोड़ प्यार से
झुमे सभी के संग
ढोलक, झांझ ,मंजीरो की धुन का
देखो अद्भुत झंकार है
ऐसा पावन पर्व है होली
खुशियों का त्योहार है ।।
    पेड़,पौधे पशु -पक्षी पर छाया
    होली का खुमार है
     बेसनबरी,फुलौरी,भभरा का
     विशेष आहार है
     कांजी,भाँग ,ठंढाई पीने को
    भीड़ जुटा भरमार है
    ऐसा पावन पर्व है होली
    खुशियों का त्योहार है ।।
अंधकार भगा प्रकाश को लाता
होली का त्योहार है
कच्चे अन्न को पका-पकाकर
बनता होला भरमार है
ब्रज रसिया और अवध पिया भी
लूटाते सभी पर प्यार हैं
ऐसा पावन पर्व है होली
खुशियों का त्योहार है
ऐसा पावन पर्व हमारा
रंगो का त्योहार है ।।
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