गणतंत्र दिवस

गणतंत्र दिवस
विधा- मुक्त छंद
हिन्द देश के अंबर पर
नव सज्जित आज विहान है
हर्षित हो लहराए तिरंगा
देशप्रेम में डूबा देश जहान है।
आजादी के दीवानों ने
संविधान निर्माण की ठानी थी
ऊँच नीच का भेद नहीं था
उन्मुक्त लहू में रवानी थी।
संविधान निर्माताओं का श्रम
गणतंत्र लागू हुआ था आज
पूर्ण स्वराज तो हासिल था
बस संविधान का था आगा़ज ।
बुद्धिजीव सुत अंबेडकर ने
संविधान को नव प्राण दिए
स्वाधीन देश के वासियों को
अधिकार कर्तव्य नवगान दिए।
प्रजातंत्र और संप्रभुता से
ओतप्रोत था यह संविधान
विश्व का विशाल गणतंत्र यह
स्वतंत्रता समानता का था ये विधान ।
राजधानी के राजपथ पर
गणतंत्र दिवस था आज मनाया
नव परिधान बसंती रंग
इंडिया गेट पर ध्वज संग छाया।
परेड झांकियों रंगारंग ने
आज़ादी का मान बढ़ाया
भारत माँ की प्रतिष्ठा में
हमने प्रतिवर्ष गणतंत्र मनाया।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई का
बहुधर्मी यह देश है
धर्मनिरपेक्षता की मिसाल है
सार्वभौम महिमा सविशेष है।
कुसुम
कुसुम लता पुंडोरा
आर.के.पुरम
नई दिल्ली
मोबाइल-९९६८००२६२९
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