KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

गाय सड़क पर- राजकिशोर धिरही (GAY SADAK PAR)

खुले सडकों पर बैठे मवेशी

कविता:

गाय सड़क पर- राजकिशोर धिरही


गाय सड़क पर देख के,हो जाते हम मौन।
लक्ष्मी अब माने नहीं,पाले इनको कौन।।


दुर्घटना अब रोज ही,करते मानव हाय।
बस बाइक कैसे चले,सड़कों पर है गाय।।


पालन पोषण बंद है,ले कर दौड़े बेत।
गाय बैल अब चर रहें,घूम घूम कर खेत।।


घर लगते टाइल्स ही,पशु पालन है बंद।
बाहर से ले दूध को,कैल्शियम रहे मंद।।


मरे कहीं पर गाय तो,बने नहीं अंजान।
माता कहते गाय को,दे पूरा सम्मान।।

बेजा कब्जा बढ़ गया,दिखे नहीं मैदान।
घास फूस उगते कहाँ,जानवर परेशान।।


राजकिशोर धिरही

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