गाय सड़क पर- राजकिशोर धिरही (GAY SADAK PAR)

खुले सडकों पर बैठे मवेशी

कविता:

गाय सड़क पर- राजकिशोर धिरही


गाय सड़क पर देख के,हो जाते हम मौन।
लक्ष्मी अब माने नहीं,पाले इनको कौन।।


दुर्घटना अब रोज ही,करते मानव हाय।
बस बाइक कैसे चले,सड़कों पर है गाय।।


पालन पोषण बंद है,ले कर दौड़े बेत।
गाय बैल अब चर रहें,घूम घूम कर खेत।।


घर लगते टाइल्स ही,पशु पालन है बंद।
बाहर से ले दूध को,कैल्शियम रहे मंद।।


मरे कहीं पर गाय तो,बने नहीं अंजान।
माता कहते गाय को,दे पूरा सम्मान।।

बेजा कब्जा बढ़ गया,दिखे नहीं मैदान।
घास फूस उगते कहाँ,जानवर परेशान।।


राजकिशोर धिरही
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राज किशोर धिरही

नाम-राजकिशोर धिरही शिक्षा-एम.ए(इतिहास,राजनीति, समाज,हिंदी)एम.लिब,बी.एड पिता-एम लाल धिरही माता-गंगा देवी पत्नी-सोनिया धिरही पुत्र-नवीन धिरही पुत्री-सौम्या धिरही पता-तिलई, जांजगीर छत्तीसगढ़ पिन-495668 पद-व्याख्याता(शा.उ.मा विद्यालय-पड़रिया अकलतरा) मोबा-9827893645 ईमेल-rajkishordhirhi45659@gmail.com