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गुलशन मेरे दिल के खिलने लगे -मनीभाई नवरत्न

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गुलशन मेरे दिल के खिलने लगे

गुलशन मेरे दिल के खिलने लगे ,
जब वह हमसे मिलने लगे ।।
मन के सारे दाग घुलने लगे ,
जब वह हमसे मिलने के लगे। कोई तो है ?

जो अपना है,
मैं जिसमें खो जाऊं ऐसी कल्पना है ।
सोच कर ही जिसको मेरी जान मचलने लगे।।

प्यार से तू प्यारी है ,
खुशियां मैंने दिल के तुझपे वारी है।
जाये तू जहां भी, हम संग जैसे चलने लगे।।

दुरियां घटा दी निगाहें मिलाने के लिए।
आशिकी बढ़ा ली प्यार पाने के लिए ।
तूने छू लिया मुझको तो रूह पिघलने लगे।।

🖋मनीभाई नवरत्न

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