KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

गोकुल राम साहू की छत्तीसगढ़ी कविता मातर तिहार मनाने को कह रही है, क्या आप जानते हैं ये मातर तिहार (matar tihar)

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            *मातर तिहार*
चलना दीदी चलना भईया,
मातर तिहार ला मनाबोन।
बड़े फजर ले सुत उठ के,
देवी देवता ला जगाबोन।।
हुँगूर धूप अगर जलाके,
देवी देवता ला मनाबोन।
रिक्छिन दाई कंदइल मड़ई संग,
मातर भाँठा मा जुरियाबोन।।
मोहरी बाजा अउ रऊत संग,
नाचत गावत सब जाबोन।
मखना कोचई अउ दार चउँर,
घरो-घर मा जोहारबोन।।
कारी लक्ष्मी भइँस मन ला,
मयूर पाँखी सोहइ पहिराबोन।
मखना ढ़ुलोके अखाड़ा जमाके,
खो-खो कबड्डी खेलाबोन।।
भाई चारा अउ एकता के,
सुग्घर संदेश ला बगराबोन।
चलना दीदी चलना भईया,
मातर तिहार ला मनाबोन।।
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             *✍रचना कार✍*
               *गोकुल राम साहू*
            *धुरसा-राजिम(घटारानी)*
        *जिला-गरियाबंद(छत्तीसगढ़)*
             *मों.9009047156*