घर का बादशाह मजदूर हो गया( ghar ka baadshah majdoor ho gya)

पेट की आग में मजबूर हो गया
घर का बादशाह मजदूर हो गया
मना रहे अवकाश मजदूर दिवस
उसे आज भी काम मंजूर हो गया
दो जून की रोटी की जुगाड़ में ही
मजबूर अपने घर से दूर हो गया।
दिवस मनाएंगे सब एसी कमरों में
वो तो धूप में ही मसरूर हो गया।
बच्चों के दे रोटी,पानी पी सो गया
भूख में चेहरा उसका बेनूर हो गया।
इक मजदूर कितना मजबूर प्रियम
थकान मिटाने नशे में चूर हो गया।
©पंकज प्रियम
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