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चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस रचना के माध्यम से कवि स्वयं को प्रभु भक्ति में लीन करना चाहता है और स्वयं के मोक्ष की कामना करता है |
चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं
मुझको पार लगा देना
गिरने लगूं तो मेरे मालिक
बाहों में अपनी उठा लेना

चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं

पुष्पक वाहन हों मेरे साथी
पुष्प भी हों मेरे सहवासी
तन को मेरे उजले मन से
जीवन सार बता देना

चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं

ध्यान तेरा हर पहर हो मालिक
मन मंदिर में बस जाना
पुण्य पुष्प बन जियूं धरा पर
मुझको तुझमे समां लेना

चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं

पुष्प समर्पित चरणों में तेरे
गीता सार बता देना
पा लूं तुझको इस जीवन में
ऐसा मन्त्र बता देना

चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं

पुण्य कर्म विकसित कर मालिक
चरण कमल श्रृंगार धरो तुम
खिला सकूं आदर्श धरा पर
पूर्ण जीव उद्धार करो तुम

चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं
चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं
चरण कमल तेरे बलि – बलि जाऊं

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