चलते-चलते ,चलते चलो(chalate chalo)

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चलते- चलते ,चलते चलो।
रुकने का ना नाम लो।
रस्में अपनी निभाते हुए ,
कसमें को तुम जान लो ।
चलते-चलते ,चलते चलो ….

दूर नहीं ,तुम्हारी मंजिल है ।
जब साफ तुम्हारा दिल है।
मुट्ठी में रखो अपनी आरजू
काबलियत ही तेरी काबिल है।
चाहे तेज हो रोशनी नजरें टिकाए रखो ।
चलते चलते चलते चलो ….

राहों में आए मुश्किल घड़ियां
तो जोश से सर उठाना ।
हंसता है तुझे जमाना तो ,
शर्म से ना सिर झुकाना ।
अच्छे काम ना सही , जोकर बनकर हंसाते रहो ।
चलते चलते चलते चलो….

बाहर से चुस्ती रहे ,
अंदर से मस्ती रहे ।
तूफान हो सागर में तेरे,
शांत तेरी कश्ती रहें।
बरसे जितना भी घटाएं तुम पंछी उड़ते रहो।
चलते चलते चलते चलो…..

मनीभाई ‘नवरत्न’, 
छत्तीसगढ़, 

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़