KAVITA BAHAR
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चलते फिरते सितारे- मनीभाई

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चलते फिरते सितारे- मनीभाई

ये चलते फिरते सितारे
धरती पे हमारे।
आंखों में है रोशनी
बातों में है चाशनी
तन कोमल फूलों सी
खुशबू बिखेरेते सारे।।
ये चलते फिरते सितारे…

ना छल है
ना छद्म व्यवहार
बड़ी मोहक है
इनकी संसार।
हम ही सीखे हैं,
खड़ा करना
आपसे में दीवार।
देख लेना एक दिन
ला छोड़ेंगे इन्हें भी
जहां होंगे बेसहारे।।
ये चलते फिरते सितारे…

किलकारियों संग 
हंसतीे खेलती
ये प्रकृति सारी।
हमने तो बस घाव दिए हैं
दोहन, प्रदूषण, महामारी।
स्वर्ग होता प्रकृति
इन बच्चों के सहारे।
ये चलते फिरते सितारे…

ये रब के दूत
ये  होंगे कपूत-सपूत
आंखों से तौल रहे
हमारी करतूत।
फल भी देंगे हमको
पाप पुण्य का
जो भी कर गुजारे।
ये चलते फिरते सितारे…

मनीभाई नवरत्न

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