KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

चलो हिंदी को दिलाएं उसका सम्मान(CHALO HINDI KO DILAYE USKA SAMMAN)

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मां भारती के माथे में ,जो सजती है बिंदी।
वो ना हिमाद्रि की श्वेत रश्मियां ,
ना हिंद सिन्धु की लहरें ,
ना विंध्य के सघन वन,
ना उत्तर का मैदान।
है वो अनायास, मुख से विवरित हिन्दी।
जननी को समर्पित प्रथम शब्द ‘मां’ की ।
सरल ,सहज ,सुबोध ,मिश्री घुलित हर वर्ण में ।
सुग्राह्य, सुपाच्य हिंदी मधु घोले श्रोता कर्ण में ।
हमारा स्वाभिमान ,भारत की शान ।
सूर तुलसी कबीर खुसरो की जुबान।
मिली जिससे स्वतंत्रता की महक।
राष्ट्रभाषा का दर्जा दूर अब तलक ।
चलो हिंदी को दिलाएं उसका सम्मान।
मानक हिंदी सीखें , चलायें अभियान।।

 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़