चित्रण

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दिनांक १६.०२.२०२०
चित्र- चित्रण-कुण्डलिया
लाया अलि ऋतुराज अब, पछुआ शुष्क समीर!
प्राकृत रीति प्रतीत जग, चुभे मदन मन तीर!
चुभे मदन मन तीर, लता तरु वन बौराए!
चाहत प्रीत सजीव, मदन तन मन दहकाए!
कहे “लाल” कविराय, विहग पशु जन भरमाया!
मृग आलिंगन बद्ध, मिलन ऋतु फागुन लाया!
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✍©
बाबू लाल शर्मा, बौहरा
सिकंदरा दौसा राजस्थान
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