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चिरागे धरती सिया समागे

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??चिरागे धरती सिया समागे??

ठाढ़े – ठाढ़े देखत रहिगे ,
अकबकागे दरबार !
चिरागे धरती सिया समागे ,
छोड़के सकल संसार !!

कईसन निष्ठुर होगे ,
जगत पति श्री राम !
जानके निष्पाप सीता के,
तीसर परीक्षा ले श्री राम !!
जनक नंदनी सिया के,
के बार होही परीक्षा ?
पवित्रता के परमान बर,
का कम हे अग्नि परीक्षा?

शूरवीर ज्ञानी – मुनि ,

बईठे हे राजदरबार !
ठाढ़े – ठाढ़े देखत रहिगे ,
अकबकागे दरबार !
चिरागे धरती सिया समागे ,
छोड़के सकल संसार !!

एक होती त सही जतेव,
शूली में चढ़ जतेव !
पबरीत कतका हों आज घलो ,
घेंच अपन कटा देतेव !!
पति त्यागेव,
त्यागेव राजघराना!
महल के सुख त्यागेव,
बन म जीनगी बिताना !!
लव -कुश पालेव -पोसेव,
सही-सही दुख अपार !
ठाढ़े – ठाढ़े देखत रहिगे ,
अकबकागे दरबार !
चिरागे धरती सिया समागे ,
छोड़के सकल संसार !!

का अयोध्या म ,
नारी के सम्मान नइ होय?
का अयोध्या म ,
नारी के स्वाभिमान नइ होय ?
अउ कतका परमान देवए,
सीता हे कतका शुद्ध !
जनक बेटी दशरथ बहू ,
गंगा बरोबर शुद्ध !!
कतका सहे अपमान सीता,
आखरी परीक्षा आगे !
में पबरीत हों त चिराजा धरती,
मोला गोदी में अपन समाले !
लगे दरबार सिया गोहरावे,
दाई लाज ल मोर बचाले !!
पतिव्रता सीता के बात सुनके,
भुईया दु फाकी चिरागे !
देखते देखत मा सीता हा,
धरती म समागे !!
ठाढ़े – ठाढ़े देखत रहिगे ,
अकबकागे दरबार !
चिरागे धरती सिया समागे ,
छोड़के सकल संसार !
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दूजराम   साहू
निवास- भरदाकला
तहसील- खैरागढ़
जिला- राजनांदगाँव (छ ग)
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