जल संकट (sankat hoga nir bin)

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संकट होगा नीर बिन, बसते इसमें प्राण ।
बूंद बूंद की त्रासदी  , देंगे खुद को त्राण ॥
देंगे खुद को त्राण , चिंतन अभी से करना ।
सबसे बड़ा विधान, नीर का मूल्य समझना ॥
बिन जल के मधु मान,बने जीवन का झंझट।
जतन करें फिर लाख,मिटाने जल का संकट॥
मधु सिंघी
नागपुर ( महाराष्ट्र )
9422101963

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