जहां भी जाऊंगा ,छा ही जाऊंगा(jaha bhi jaunga, chha hi jaunga)

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जहां भी जाऊंगा ,छा ही जाऊंगा
बादल की तरह ,आंचल की तरह।
जहां भी जाऊंगा, वहां  सजाऊंगा
गुलशन की तरह, दुल्हन की तरह ।।
राहों के पड़े कचरे , डस्टबीन में ।
हरियाली बिखेरेंगे इस जमीन में।
जरूरतमंद की करूँ मैं सहायता ।
सिवा इसके, मैं  कुछ ना चाहता ।
जहां भी जाऊंगा खुशियां लाऊंगा
बहार की तरह , प्यार की तरह।।
छोटे छोटे बच्चे ,  जो पढ़ ना सके ।
गरीबी हालत में,आगे बढ़ ना सके ।
उन सबको बुलाके,मैं कक्षा लगाऊँ ।
मेहनत सिखाके,जिन्हें पास कराऊँ।
जहां भी जाऊंगा ,सबको हंसाऊँगा ।
जोकर की तरह , लाफ्टर की तरह।
सूखे सूखे बीज, मिट्टी में डाल के।
भोजन उन्हें दूँ ,पानी व खाद के ।
बढ़े वो मुझसे आगे बनकर के पेड़,
रोटी कपड़ा और मकान देते हैं पेड़।
जहां भी जाऊंगा धाक जमाऊँगा
चहेता की तरह, फरिश्ता की तरह।।
 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़