KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

जिंदगी

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ये जो जिंदगी की प्यास है
ये प्यास भी अजीब है
जिसे ढूंँढती ही रह गई
वह ख्वाब भी अजीब है।।

इस शम्माए दिल में जो जल रहा
वह दिया है तेरे नाम का
उसे अभी भी है खबर ना थी थी
कोई मर रहा उसके लिए ।।

न ऐसा कोई मिल सका जो
मुझको अपना बना सके
उसे खोजने में यह सफर गया
उसे खोजने में उम्र गई।।

मैं घूमती ही गई मेरे हमनशी
मेरे हम नवा
न वो आसमां मुझे मिल सका
न वो जम़ी मुझको मिली

ये जो जिंदगी की प्यास है
ये प्यास भी अजीब है।।

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