जीवन का पाठ है योग(jivan ka path hai yog)

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भौतिक सुखों को त्याग कर ,
सही दिशा में प्रयास कर, 
रहना अगर निरोग तुझे ,
मानव नित योग का उपयोग कर।।

पौराणिक संस्कृति संभाल उसका सार,
नहीं तो विदेशी कर देंगे तार तार, 
युवा तुझे ही बनना होगा ढाल ,
न लुप्त होने देना योग विचार ।।

जीवन का पाठ है योग ,
आओ मिलकर करें सब लोग ,
आसन सीख कर सिखाएं ,
जीवन भर नहीं होगा रोग।।

अरुणा डोगरा शर्मा

८७२८००२५५५

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