KAVITA BAHAR
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झांसी की रानी(jhasi ki rani)

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वाराणसी में जन्मी झांसी की रानी ।
आओ सुनाऊं तुम्हें उसकी कहानी।।
मनु, मणिकर्णिका और वो छबीली।
मोरोपन्त भागीरथी की गोद में पली।
शौक जिसका तीरंदाजी घुड़सवारी ।
आओ सुनाऊं तुम्हें उसकी कहानी।।
नाना साहब के साथ जो पली बढ़ी।
पुरुषों को भी चित कर दे ऐसे लड़ी।
देख जिसे सबको होती थी हैरानी ।
आओ सुनाऊं तुम्हें उसकी कहानी।।
सात वर्ष में कर दी गई मनु की शादी।
गंगाधर राव की बन गई जीवनसाथी।
हाय रे नियति ! क्यों विधवा हुई रानी ।
आओ सुनाऊं तुम्हें उसकी कहानी।।
अंग्रेज समझे लावारिस हुई ये झांसी।
दामोदर को पाके,पर अड़ी हुई झांसी।
अंग्रेजी मनसूबे को, फेर दी जो रानी।
आओ ,सुनाऊं तुम्हें उसकी कहानी।।
सिंहनी लक्ष्मीबाई क्रोध से गरज उठी ।
“मैं नहीं दूँगी अपनी झाँसी”  कह उठी।
विद्रोह कराके अंग्रेजों ने की मनमानी।
आओ ,सुनाऊं तुम्हें उसकी कहानी।।
सदाशिव को परास्त किया करोरा में।
नत्थे खां को ,तारे दिखा दिये दिन में।
फिरंगियों से लड़ने को जो थी ठानी।
आओ ,सुनाऊं तुम्हें उसकी कहानी।।
अब आगे जनरल ह्यू रोज की बारी ।
सर कफ़न सजाके ,रानी की तैयारी।
पीठ पे बंधा दामोदर, भिड़ गई रानी।
आओ ,सुनाऊं तुम्हें उसकी कहानी।।
जब झांसी की बागडोर,तात्या संभाले।
रानी युद्ध को कालपी से ग्वालियर चले।
जून अन्ठावन को वीरगति हुई रानी।
आओ ,सुनाऊं तुम्हें उसकी कहानी।।
लक्ष्मीबाई है महान, तोड़ दिया मिथ्या।
स्त्री होती नहीं अबला, सबको बताया।
वो वीरांगना-साहसी , साक्षात् भवानी।
आओ ,सुनायें सबको उसकी कहानी।।
✒️ मनीभाई”नवरत्न”, बसना, महासमुंद,छग

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